0

उबासी की सजा : tenali raman story in hindi

tenali raman story in hindi aap tenali raman ki majedaar kahaniyaan padh rahe hai sirf inhindi par aesi hi aur kahaniyon ke liye hamara page like karein aur apne dosto ke saath share karna na bhoolein.tenali ki ek aur majedaar kaahani aap idhar padh sakte hai
एक दिन तेनालीराम को संदेश मिला कि रानी तिरुमलादेवी इस समय बड़े संकट में हैं और आपसे मिलना चाहती हैं । तेनालीराम तुरन्त रानी जी से मिलने गए । ”रानी जी! कैसे याद किया सेवक को ?” ”तेनालीराम जी! हम एक भारी मुसीबत में फंस गए हैं ।”

”मेरे होते आप किसी प्रकार की चिन्ता न करें और मुझे बताएं कि क्या बात है ।” दिलासा पाकर रानी की औखें भर आईं । वे बोलीं: ”बात दरअसल ये है कि महाराज हमसे काफी नाराज हैं ।” ”किन्तु क्यों ? क्या हुआ था ?” ”एक दिन वह हमें अपना एक नाटक पढ़कर सुना रहे थे कि हमें उबासी आ गई, बस इसी बात पर महाराज नाराज होकर चले गए ।

तब से आज तक कई दिन हो गए हैं, महाराज ने इस तरफ का रुख ही नहीं किया । हालांकि इसमें मेरा कोई दोष नहीं था, फिर भी मैंने महाराज से माफी मांगी, पर महाराज पर कोई असर नहीं हुआ । अब तो तुम्हीं हमारी इस समस्या को हल कर सकते हो तेनालीराम ।”

”आप किसी प्रकार की चिन्ता न करें । मैं अपनी ओर से पूरा प्रयास करूँगा ।” महारानी को ढांढस बंधाकर तेनालीराम दरबार में जा पहुंचे । महाराज स्थ्य रेठे राज्य में चावल की खेती पर मंत्रियों से चर्चा कर रहे थे । ”चावल की उपज बढ़ाना बहुत आवश्यक है ।”

महाराज कह रहे थे: ”हमने बहुत प्रयत्न किए । हमारे प्रयत्नों से स्थिति में सुधार तो हुआ है, लेकिन समस्या पूरी तरह सुलझी नहीं है ।” ”महाराज!” तभी तेनालीराम ने चावल के बीजों में से एक-एक बीज उठाकर कहा: ”यदि इस किस्म का बीज बोया जाए तो इस साल उपज दुगनी-तिगुनी हो सकती है ।”

”अच्छा-क्या इस किस्म का बीज इसी खाद में हो जाएगा ?” ”हां महाराज! किसी प्रकार का और दूसरा प्रयत्न करने की आवश्यकता ही नहीं है किन्तु…।” ”किन्तु क्या तेनालीराम ।” ”इसे बोने, सींचने और काटने वाला व्यक्ति ऐसा हो जिसे जीवन में कभी उबासी न आई हो और न कभी आए ।”

”तेनालीराम! तुम्हारे जैसा मूर्ख मैंने आज तक नहीं देखा ।” महाराज चिढ़ से गए: ”क्या संसार में ऐसा कोई व्यक्ति है जिसे कभी उबासी न आई हो ।” ”ओह! क्षमा करें महाराज! मुझे नहीं मालूम था कि उबासी सभी को आती है: मैं ही क्या, महारानी जी भी यही समझती हैं कि उबासीदृआना बहुत बड़ा जुर्म है: मैं अभी जाकर महारानी जी को भी बताता हूं ।”

अब महाराज की समझ में पूरी बात आ गई । वे समझ गए कि हमें रास्ते पर लाने के लिए ही तेनालीराम ने ऐसा कहा है । वे बोले: ”मैं स्वयं जाकर महारानी को बता दूंगा ।” महाराज तुरन्त महल में जाकर रानी जी से मिले और उनके सभी शिकवे समाप्त कर दिए ।

Sumit

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *